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वाक् स्वतंत्रता हमारा संवैधानिक अधिकार है !!! हमारी स्वत्नत्रता वाधित करना !! संविधि की भावनाओं के विरुद्ध कदम होगा खामी सिस्टम में है लोक-अपवाद जन-अधिकार है इस अधिकार को दवाने का प्रयास आपको कटघरे में खड़ा कर सकता है


  • इमानदारी का चोला पहनने वाले सच्चाई सुनने को तैयार क्यों नही होते !! हम भारत के नागरिक है हमे अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है !!! और संविधान की भावनाओं के अनुरूप कार्य करना प्रत्येक संवैधानिक पद पर बैठे प्रशाशनिक अधिकारी का दायित्व है
  • इसके बाबजूद हमारी वाक् स्वतंत्रता को दवाने की कोशिश की जाती है "किसी भी प्रशाशनिक अधिकारी" द्वारा हमें धमकाया जाता है कि आप "कुछ भी लिखोगे" शोशल नेटवर्क जनता के लिए अपनी बात रखने का स्वतंत्र मंच है !! लेकिन सिस्टम की खामियों के विषय पर हमें बोलने का अधिकार नही है !! हमारा स्वाधीनता का अधिकार छीनना भी तो अपराध है !!!

  • अगर आप कानूनी दायरे में काम कर रहे हो तो ऐसा क्यों होता है कि आम आदमी जब आपके अवगुणों को उजागर करे तो भी वह अपराध करता है !! और आप पावर का दुरूपयोग कर अवैधानिक कार्य करो तो भी अपराध नही है !!! 
  • *इसलिये मेरी आवाज को दबाने वाला स्वमं के विषय में अनुसंधान करें वो कितना दूध का धुला है !! क्योंकि हम भिन्ड के आम आदमी नही है !! जो आपके पावर के भय के कारण चुपचाप घर बैठ जाएं आप कानूनी दायरे में काम कर रहे हो या मेंरा स्वतंत्र रूप से लिखना क़ानून के दायरे में नही है !! इस बात का फैसला उच्च न्यायालय करेगा इसलिये मुझसे बात करना है तो पूर्णरूप से क़ानून के दायरे में रह कर ही करना होगा !
  • क्योंकि में हमेशा इसी फ़िराक में रहता हूँ की झूटी लोकप्रियता बटोरनेवालों का कोई वीक पॉइंट मिले आप और हम वैज्ञानिक युगमेंजी रहे है !! इसलिए वैज्ञानिक उपकरणों से सावधान रहना !नहींतोपता चले आपकी कोई वीडियो या ऑडियो उच्च न्यायालय केसमक्षमेरा पक्ष मजबूत करने में काम आ जायें !!! इसलिये सावधान malkhan singh
    http://bhindmalkhan.blogspot.com/2016/09/blog-post_25.html
    malkhan singh
    रहें!! किसी की स्वत्नत्रता सिर्फ ठोष सबूतों के आधार पर ही वाधित कर सकते है !!! में समझता हूँ की आप न्यायालय की कार्यवाही को भी प्रभावित कर सकते हो पर अपना भी अंतिम न्यायालय माननीय सुप्रीम कोर्ट है !!!!

  • मलखानसिंह भदौरिया
  • भिण्ड

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